चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग

उत्तर प्रदेश, भारत

माह - मार्च

  • पूर्वी व मध्य क्षेत्र में बसन्तकालीन गन्ने की बुवाई प्रत्येक दशा में माह के अन्त तक समाप्त कर लेनी चाहिए।
  • पूर्वी व मध्य क्षेत्र में जमाव उपरान्त तुरन्त हल्की सिंचाई (बुवाई के 30-35) दिन के बाद करें तथा ओट आने पर गुड़ाई करें।
  • शरद्कालीन गन्ने के साथ अन्त: फसल यदि खड़ी हो तो आवश्यकतानुसार विशेषकर गेहूं में हल्की सिंचाई करें।
  • शरद्कालीन गन्ने में यदि फरवरी माह में यूरिया की टापड्रेसिंग न किये हो तो मार्च में सिंचाई करें तथा 132 किग्रा0/है0 यूरिया की टापड्रेसिंग करें।
  • फसल की परिपक्वता के आधार पर बावग गन्ने की कटाई करें जिस खेत में पेड़ी फसल लेनी हो तो उसकी कटाई इस माह में अवश्य करें। बावग गन्ने की कटाई उपरान्त खेत में मेड़ गिराने के उपरान्त ठूठों की छटाई, पंक्तियों के दोनो तरफ गुड़ाई, 200 किग्रा0 यूरिया/है0 के पंक्ति के दोनो तरफ प्रयोग एवं भूमि में मिलाना तथा रिक्त स्थानों की पूर्व अंकुरित पैड़ों से भराई करें।
  • शरदकालीन बावग गन्ने में यदि चोटी बेधक/अंकुरबेधक से ग्रसित पौधा हो तो उस भूमि के सतह से काटकर निकाल देना चाहिये जिससे उसकी अगली पीढ़ी का आपतन कम हो जाए।
  • पूर्वी उ0प्र0 में तापक्रम अधिक हो जाता है। अत: इस माह से ही हल्क सिंचाई प्रत्येक 20-25 दिन के अन्तराल पर करते रहना चाहिये।
  • खर-पतवार नियन्त्रण हेतु कस्सी/फाबड़े से गुड़ाई करना श्रेयस्कर है। अत: प्रत्येक सिंचाई के उपरान्त मार्च-जून तक गुड़ाई फाबड़े या कल्टीवेटर से करनी चाहिये। श्रमिक की समस्या होने पर पहली सिंचाई उपरान्त गुड़ाई करके गन्ने की सूखी पत्तियां बिछानी चाहिए। यदि इसे भी करना सम्भव न हो तो गन्ना बुवाई के 7-10 दिन के मध्य पेन्डीमिथेलीन खरपतवार नाशी रसायन का 3.3 ली0 दबा 1150 ली0 पानी में घोलकर समान रूप से छिड़काव करना चाहिए।
  • एजोटोबैक्टर या एजोस्पाइरिलम 5 किग्रा0/हे0 की दर से प्रथम सिंचाई के उपरान्त पौधों के पास डालना चाहिए।
  • पी0एस0बी0 5 किग्रा0/हे0 की दर से प्रथम सिंचाई के उपरान्त डाले।