चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग

उत्तर प्रदेश, भारत

माह - जनवरी

  • शरद्कालीन नवलख एवं खड़ी गन्ना फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें ताकि गन्ना फसल पाला के कुप्रभाव से बच सके। यह वर्ष कम वर्षा का रहा है, अत: फसल की उत्पादकता में वृद्धि हेतु शरद्कालीन सिंचाई आवश्यक है।
  • शरद्कालीन गन्ने के साथ विभिन्न अन्त: फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई गुड़ाई, उर्वरक प्रयोग करें। आलू, लाही सब्जियां तैयार हो गयी होगी इन फसलों को काट लें तथा आवश्यकतानुसार गन्ना फसल में सिंचाई पूर्व अंकुरित पौध से रिक्त स्थान भरें।
  • शीघ्र एवं मध्य देर से पकने वाली प्रजातियों को पेड़ी गन्ना, शीघ्र पकने वाली प्रजातियों का शरदकालीन बावग गन्ना काटकर चीनी मिल की आपूर्ति करें। गन्ना कटाई व चीनी मिल आपूर्ति में 24 घंटे से अधिक समय न लगाये।
  • बसन्तकालीन गन्ने की बुवाई का उपयुक्त समय पूर्वी उ0प्र0 में मध्य जनवरी से फरवरी, मध्य क्षेत्र के मध्य फरवरी से मध्य मार्च तथा पश्चिमी क्षेत्र में मध्य फरवरी से मार्च है। अत: पूर्वी उ0प्र0 के किसान लाही आदि से खाली खेत में कार्बनिक खादों का प्रयोग करते हुए खेती की तैयारी करें।
  • बसन्तकालीन बुवाई से पूर्व मृदा परीक्षण कराये तथा खादीय संस्तुति के अनुसार संतुलित उर्वरक की व्यवस्था करें एवं उनका बुवाई के समय उपयोग सुनिश्चित करें। 50 किग्रा0 नत्रजन, 60 किग्रा0 फास्फोरस, 20 किग्रा0 पोटाश व 25 किग्रा0 जिंक सल्फेट का प्रयोग करें।
  • बुवाई से पूर्व गन्ना बीज की व्यवस्था करें। कुल बावग क्षेत्रफल का 1/3 भाग शीघ्र पकने वाली प्रजातियों के अन्तर्गत रखें। स्वीकृत प्रजातियों का चुनाव करें। बीज गन्ना में पानी की मात्रा पर्याप्त बनाये रखने हेतु काटने से पूर्व उसमें पानी लगायें। तीन-तीन ऑंख का टुकड़ा काटकर पारायुक्त रासायन से उपचारित करें।
  • बीज उपचार हेतु पारायुक्त रासायन एगलाल-3 : ( 560 ग्राम ) एरीटान 6 : ( 280 ग्रा0द्ध या एम0ई0एम0सी0 6 : (280 ग्रा0द्ध या बावस्टिन 110 ग्रा0 करे 100-125 लीटर पानी में घोलकर टुकड़ों को उपचारित करें। बुवाई के समय दीमक व अंकुरबेधक नियन्तत्रणह हेतु फोरेट 10 जी0-25 कि0ग्रा0 या सेबिडाल 4.4 जी-25 किग्रा0 या लिन्डेन 6 जी0 20 किग्रा0 / हैक्टेयर या गामा बी0एच0सी0 20 ई0सी0 6.25 लीटर या क्लोरपाइरीफास 20 ई0सी0 5 ली0 हे0 का प्रयोग करें। घोल वाली दवा के साथ 1875 लीटर पानी का प्रयोग करें।