चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग

उत्तर प्रदेश, भारत

माह - फरवरी

  • शरदकालीन व बसन्तकालीन शीघ्र पकने वाली प्रजातियों की कटाई यदि शेष रह गयी हो तो करें एवं उसकी पड़ी रखने हेतु तत्काल मेड़ों को गिराते हुए ठूठों की छटाई करें। सिंचाई उपरान्त ओट आने पर पंक्तियों के दोनों तरफ से गुड़ाई करें तथा उस समय 200 किग्रा0 यूरिया/हे0 लाइनों में डाल दें। सूखी पत्तियों को समान रूप से दो पंक्तियों के मध्य फैला दें तथा इसके ऊपर लिन्डेन 1.3 : धूल का 25 किग्रा0/है बुरकाब करें ताकि अवशेष कीटर मर जायें।
  • मध्य क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र में बुवाई का समय 15 फरवरी के उपरान्त आता है। अत: 30 : क्षेत्रफल में शीघ्र पकने वाली प्रजातियों की बुवाई हेतु को0शा0 8436, 88230, 96268, को0से0 98231 को0से0 94536 में से अपनी सुविधानुसार एक या दो प्रजातियों का चुनाव करें तथा शेष 70 : क्षेत्रफल में मध्य-देर से पकने वाली प्रजातियों का चयन करें।
  • जलभराव वाले क्षेत्रों में फरवरी-मार्च में प्रत्येक दशा में बुवाई करनी चाहिए। जलभराव हेतु यू0पी0 9529, 9530 व को0से0 96436 प्रजातियों में से एक या दो का चुनाव करें।
  • खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद 18 टन या बायाकम्पोस्ट 4.5 टन या 9 टन/है0 की दर से खेत में बिखेर कर जुताई करें। पलेवा उपरान्त पहली जुताई 20 से 22 सेमी0 गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • फरवरी में बुवाई करने की दशा में दो पंक्तियों के मध्य 90 से0मी0 दूरी रखनी चाहिए। दोहरी पंक्ति विधि 90:30:90 सेमी0 से भी बुवाई करनी उपयोगी है।
  • बीज गन्ना स्वीकृत पौधशाला जिसमें पर्याप्त मात्रा में उर्वरक व पानी का प्रयोग किया गया हो से ही लेना चाहिये। यदि सामान्य फसल से बीज गन्ना लेना हो तो कटाई से पूर्व पानी लगा देना चाहिए। छोटी पोरी वाले गन्ने की 3 ऑंंख एवं बड़ी पोरी वाले गन्ने गन्ने की 2 ऑंख का टुकड़ा काटना चाहिये। टुकड़ों को माह जनवरी में वर्णित रासायन से उपचारित करके ही बोये तो जमाव अच्छा होगा।
  • मृदा परीक्षण के आधार पर कुल नत्रजन का 1/3 (150किग्रा0/है0द्ध एवं फास्फोरस 60 किग्रा0, पोटाश 20 किग्रा0 बुवाई के समय कूड़ों में पहले प्रयोग करें। उर्वरक डालने के बाद उसके ऊपर थोड़ा मिट्टी गिरायें उसके बाद प्रतिफुट 3 ऑंख का एक पैड़ बोयें। प्रतिमीटर 10 ऑंख की बुवाई करें। पैड़ों के ऊपर दीमक व अंकुर बेधक के नियंत्रण हेतु माह जनवरी में उल्लिखित कीटनाषकों में से किसी एक का प्रयोग कर ढकाई करें।
  • अन्त: फसल होने की दशा में यदि फसल तैयार हो गयी तो उसकी शीघ्र कटाई करें तथा तत्काल सिंचाई कर उर्वरक प्रयोग करते हुये गुड़ाई करें। गेहूं की फसल में सिंचाई करें।
  • शरदकालीन बावग गन्ने में सिंचाई कर 60 किग्रा0 नत्रजन/है0 (132 किग्रा0 यूरिया) की पहली टापड्रेसिंग करें।
  • फरवरी के मध्य देर से पकने वाली प्रजातियों के बावग गन्ने की कटाई करें तथा तत्काल उसकी पेड़ी रखने हेतु कर्षण क्रियायें माह जनवरी में वर्णित विधि के अनुसार करें।
  • फरवरी माह में बुवाई करने की दशा में मूंग अन्त: फसल की बवाई करें। इस समय भिण्डी की भी अन्त: खेती करना लाभकारी होगा।